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Friday, 31 July 2020

एउटा लघु कथा “राजालाई तनाव”

एउटा राजा थियो र एउटा फकिर थियो । कारणवश केही समय दुबै एक स्थानमा सँगै बस्नुपर्ने अवस्था आयो । स्थान एउटै भए पनि दुबै फरक फरक दुरीमा एक अर्कालाई न देखिने गरी बस्नुपर्ने भएको थियो । फकिरलाई खान बस्नको समस्या थिएन । उसलाई राजाले सबै व्यवस्था मिलाई दिएको थियो । बेला बेलामा भेट भए पनि बिहानै र बेलुकी सुत्ने समयमा भने देखभेंट हुँदैन थियो । राजा बस्ने ठाउँमा अन्य राजाहरु पनि आएका थिए । सबै राजाहरु सँगै खान्थे र सँगै बस्थे । राजाहरुको बसाई अलि फरक थियो । दिनको र रातिको खानाको व्यवस्था राम्रो भए पनि बिहानको चिया, खाजा तथा दिउँसोको खाजाको व्यवस्था भने रहेनछ । यता फकिरलाई भने राजाले सबै राम्रो व्यवस्था मिलाई दिएको थियो । फकिरलाई सबै आफै बनाउनु पर्ने भएको कारण जति बेला जे मन लाग्यो आवश्यकता अनुसार बनाएर खान सक्थ्यो ।  राजा बडो दोधारमा परेको थियो । बिहान उठ्ने बित्तिकै तनाव शुरु हुन्थ्यो । दरबारमा बिहान बिहान उठेर फ्रेस हुने बित्तिकै चिया खाने बानि थियो, तर त्यो कहाँ पाउनु, खाजामा हल्का खानेकुरा समावेश हुन्थ्यो तर त्यो कहाँ पाउनु ! अनि राजा बिहान बिहान तनावमा हुन्थे । बिस्तारै उठेर फ्रेस भइ तातो पानि सम्मको व्यवस्था भने थियो, त्यसैबाट चित्त बुझाउनु परेको थियो राजालाई । यता उता गर्दै खाना खाने समय भइ हाल्थ्यो र सबै राजाहरू हल्ला खल्ला गर्दै खाना खान्थे । खानामा भने राम्रो परिकारहरूको व्यवस्था हुन्थ्यो त्यसैले राजाले खुशी खुशी खान्थियो । त्यस पछि अन्य काममा सबै सँगै मिलेर लाग्थे र दिन बित्थ्यो । बिस्तारै दिउँसो हुन थाले पछि खाजा खाने समयमा राजालाई फेरी तनाव शुरु हुन्थ्यो । दिउँसोको खाजामा के खाने होला भनेर राजा फेरी चिन्तित हुन थाल्थ्यो । यता उता हल्लिँदै समय बित्थ्यो तर भोकले चरम रूप लिए पछि घुम्दै फकिर कहाँ पुग्थ्यो । एक छिन बसे पछि धन्न फकिरले राजालाई कही खानेकुरा, चिया, बिस्कुटको लागि सोध्थ्यो र राजाले लाजैले भएपनि हुन्छ भनेर ल्याइदिएको खानेकुरा मख्ख पर्दै खान्थे ।

राजा एक्लै भएको बेला सोच्ने गर्थे, आखिर राजा भएर के नै पाएँ ? यसो आफ्नो र फकिरको जीवनसँग दाँजेर हेर्ने गर्थे । फकिर कति खुशी छ, केही तनाव छैन र सुख मय जीवन व्यतीत गर्दै छ । यता आफ्नो जीवन हेर्ने हो भने तनावै तनाव छ । बिहान उठ्ने बित्तिकै के खाने भनेर चिन्ता, दउँसोको खाजामा के खाने भनेर चिन्ता, मेरै फकिरले कसरी जीवन यापन गर्दैछ भनेर त्यसको पनि चिन्ता राजालाई नै । तर आफूलाई के चाहिएको छ के गरि दिनु पर्छ भनेर कसैले सोच्दिन पर्दैन । आफूले जे पनि गर्न पाउने र जे पनि खान हुने  छुट नभएको ।

राजालाई तनाव एउटा मात्रै हैन रैछ उसलाई त तनावै तनाव…


Monday, 24 March 2014

Human Nature according to their Belly

सुंदर पेट किसी भी व्यक्ति के सौंदर्य में वृद्धि करता है। विशेष रूप से किसी स्त्री के लिए सुंदर और आकर्षक पेट काफी मायने रखता है। जिस स्त्री का पेट सुंदर दिखाई देता है, उसका आकर्षण काफी अधिक रहता है। जबकि बेडोल और मोटे पेट की वजह से चेहरे की सुंदरता भी कई बार फीकी पड़ जाती है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार हम किसी स्त्री या पुरुष के पेट को देखकर भी उसके स्वभाव की खास बातें बातें मालूम कर सकते हैं।

जानिए पेट के आधार पर किसी स्त्री या पुरुष के स्वभाव की बातें कैसे मालूम की जा सकती हैं...

‐          जिस स्त्री का पेट अधिक ऊंचा दिखाई देता है, वह पुरुषों की ओर जल्दी आकर्षित हो जाती हैं। इस प्रकार के पेट वाली स्त्रियां हमेशा सुंदर दिखने का प्रयास करती हैं। आमतौर पर इसप्रकार के पेट वाली स्त्री अपने पति से संतुष्ट नहीं रहती है।
‐          यदि किसी स्त्री या पुरुष के पेट पर एक वलि (रेखा) होती है तो वह शास्त्रों का ज्ञाता होता है। ऐसे लोग घर-परिवार और समाज में विशेष स्थान हासिल करते हैं।
‐          जिन स्त्रियों का पेट बहुत सुंदर दिखाई देता है, वे भाग्यशाली होती हैं। चिकना, पतला और सुंदर आकार का पेट शुभ होता है। ऐसी स्त्रियां जीवन में कई उपलब्धियां हासिल करती हैं।
‐          यदि किसी स्त्री का पेट, कमर के बराबर मोटा होता है तो ऐसी स्त्री किसी परिरिस्थिति में हार नहीं मानती है। ये स्त्रियां धन संबंधी कार्यों में समझौता भी नहीं करती हैं। आमतौर पर ऐसे पेट वाली स्त्रियां पति के लिए भाग्यशाली होती हैं।
‐          जिन स्त्रियों के पेट का आकार बेडोल और सुंदर नहीं दिखाई देता है, आमतौर पर वे अपने जीवन में काफी संघर्ष करती हैं।
‐          यदि किसी पुरुष के पेट पर दो रेखाएं दिखाई देती हैं तो व्यक्ति स्त्री का उपभोग करने वाला होता है।
‐          जिन लोगों के पेट पर तीन रेखाएं पड़ती हैं, वह आचार्य पद प्राप्त करता है। ऐसे लोग विद्वान होते हैं और अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां हासिल करते हैं।
‐          जिन लोगों के पेट पर चार रेखाएं दिखाई देती हैं, वे लोग अधिक पुत्र संतान प्राप्त करते हैं।
‐          यदि किसी व्यक्ति के पेट पर एक भी रेखा नहीं दिखाई देती है तो ऐसे लोग किसी राजा के समान सुख प्राप्त करने वाले होते हैं। ऐसे लोग शाही अंदाज में जीवन व्यतीत करते हैं।

नाभि बताती है ये बातें

‐    जिन लोगों की नाभि दक्षिणावर्त यानी सीधे हाथ की ओर मुंह वाली होती है, वे लोग भाग्यशाली होते हैं। जबकि वामवर्त नाभि यानी बाएं हाथ की ओर मुंह वाली नाभि अशुभ मानी जाती है।
‐    जिन लोगों की नाभि गहरी होती है, वे लोग जीवन में सभी सुख और सुविधाएं प्राप्त करते हैं।
‐    जिन लोगों की नाभि ऊंची होती है, वे लोग कई बार अपनी माता के दुख का कारण बनते हैं।

पेट पर तिल हो तो

- जिन लोगों के पेट पर तिल होता है, वे लोग अलग-अलग तरह का खाना पसंद करते हैं। इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य अच्छा भोजन खाना ही होता है।

- जिन लोगों के पेट के एकदम बीच में तिल होता है, वे लोग डरपोक प्रवृत्ति के हो सकते हैं।

- व्यक्ति की पसली पर तिल होना व्यक्ति के डरपोक स्वभाव की ओर इशारा करता है।

‐    ध्यान रखें कि स्त्री के शरीर पर बाएं ओर के तिल शुभ होते हैं जबकि पुरुष के शरीर पर दाहिनी ओर के तिल शुभ माने गए हैं।

Friday, 13 September 2013

शरीर पर तिल होने का फल

माथे पर--------------बलवान हो
ठुड्डी पर-------------स्त्री से प्रेम न रहे
 दोनों बांहों के बीच---यात्रा होती रहे
दाहिनी आंख पर-----स्त्री से प्रेम
बायीं आंख पर-------स्त्री से कलह रहे
दाहिनी गाल पर------धनवान हो
बायीं गाल पर--------खर्च बढता जाए
होंठ पर--------------विषय-वासना में रत रहे
कान पर-------------अल्पायु हो
गर्दन पर------------आराम मिले
दाहिनी भुजा पर------मान-प्रतिष्ठा मिले
बायीं भुजा पर---------झगडालू होना
नाक पर---------------यात्रा होती रहे
दाहिनी छाती पर-------स्त्री से प्रेम रहे
बायीं छाती पर----------स्त्री से झगडा होना
कमर में-----------------आयु परेशानी से गुजरे
दोनों छाती के बीच-------जीवन सुखी रहे
पेट पर-------------------उत्तम भोजन का इच्छुक
पीठ पर------------------प्राय: यात्रा में रहा करे
दाहिने हथेली पर---------बलवान हो
बायीं हथेली पर-----------खूब खर्च करे
दाहिने हाथ की पीठ पर----धनवान हो
बाएं हाथ की पीठ पर------कम खर्च करे
दाहिने पैर में-------------बुद्धिमान हो

बाएं पैर में---------------खर्च अधिक हो
गर्दन से जानिए दूसरोका स्वभाव

मोटी गर्दन- समुद्र शास्त्र के अनुसार जिस इंसान की गर्दन मोटी होती है, प्राय: ऐसे लोगों की नीयत खराब होती है। ऐसे लोग भ्रष्ट चरित्र, व्यसनी, शराबी, दु:स्साहसी, क्रोधी, अहंकारी, उन्मादी तथा अधिक आक्रामक होते हैं। इन पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता।

सीधी गर्दन- समुद्र शास्त्र की माने तो जिन लोगों की गर्दन सीधी होती है ऐसे लोग स्वाभिमानी होते हैं। साथ ही ये लोग समय के पाबंद, वचनबद्ध एवं सिद्धांतप्रिय होते हैं। इन पर आसानी से विश्वास किया जा सकता है।

लंबी गर्दन- अगर गर्दन सामान्य से अधिक बड़ी हो तो ऐसे जातक बातूनी, मंदबुद्धि, अस्थिर, निराश और चापलूस होता है। यह अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की आदत से लाचार भी होता है।

छोटी गर्दन- अगर गर्दन सामान्य आकार से छोटी होती है तो ऐसे जातक कम बोलने वाले, मेहनती, हितसाधक मगर धूर्त, कंजूस, अविश्वसनीय व घमण्डी होते हैं। ऐसे लोगों का फायदा दूसरे लोग उठाते हैं मगर इनहे इस बात का पता भी नहीं चलता।

सूखी गर्दन- ऐसी गर्दन में मांस कम होता है तथा नसें स्पष्ट दिखाई देती हैं। ऐसे जातक सुस्त, कम महत्वाकांक्षी, सदैव रोगी रहने वाला, आलसी, क्रोधी, विवेकहीन और हर कार्य में असफल होते हैं। ये सामान्य स्तर के लोग होते हैं और अपने जीवन से संतुष्ट भी।

ऊंट जैसी गर्दन- ऐसी गर्दन पतली व ऊंची होती है। ऐसे जातक आमतौर पर सहनशील, अदूरदर्शी व परिश्रमप्रिय होते हैं। इनमें से कुछ लोग धूर्त भी होते हैं। ये लोग अपना हित साधने में लगे होते हैं और समय आने पर किसी भी हद तक जा सकते हैं।


आदर्श गर्दन- ऐसी गर्दन पारदर्शी व सुराहीदार होती है, जो आमतौर पर महिलाओं में पाई जाती है। ऐसी गर्दन कलाप्रिय, कोमल, ऐश्वर्य और भोग की परिचायक होती है। ऐसे जातक सुख व वैभव का जीवन जीते हैं। 

Thursday, 10 May 2012

सुकून से गुजरेगा जीवन

मुश्किलों से बचना या आसान जीवन जीना इंसान की स्वाभाविक चाहत है। किंतु सुरक्षित जीवन की यह भावना इंसान के दिमाग पर ज्यादा हावी हो जाती है, तो वह हर दिन, हर पल उठते-बैठते आस-पास के लोगों या बातों को लेकर असंतुष्ट होने लगता है। जिससे वह अशांत या व्यर्थ दबाव व तनाव में रहकर अकेलेपन का शिकार भी होने लगता है। 

शास्त्रों के मुताबिक संसार में रहकर भी जीवन से जुड़े नजरिए को लेकर अज्ञानता ही ऐसी मनोदशा पैदा करती है। जिससे बचकर व्यावहारिक जीवन की सफलता के लिए हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत की विदुर नीति में एक बेहतरीन सूत्र बताया गया है। जिसके मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में 5 तरह के लोग अहम भूमिका निभाते हैं। इंसान को इस बात को समझकर हर स्थिति का सामना करने को तैयार रहना चाहिए। 

लिखा गया है कि - 

पञ्च त्वानु गमिष्यन्ति यत्र यत्र गमिष्यसि। 
मित्राण्यामित्रा मध्यस्था उपजीव्योपजीविन:।। 

इस श्लोक का मतलब व इसमें छिपा संकेत है कि जीवन में जहां-जहां भी जाएंगे, वहां पर इन पांच तरह के लोगों के बीच जीवन गुजारना होता है, इनसे सही तालमेल जीना आसान बना देता है। ये 5 लोग हैं - 

मित्र - समान विचार, व्यवहार व भावना रखने वाले लोग आपके करीबी बन मित्र रूप में सहयोगी बनते हैं। 

शत्रु - काम, स्वार्थ या हित के चलते विरोधी, द्वेषी या ईर्ष्या भाव रखने वाले लोग शत्रुता का व्यवहार करते हैं। 

उदासीन - ऐसे लोग जो अच्छा हो या बुरा न आपका सहयोग न विरोध करे। ऐसे लोगों का व्यवहार असामान्य व निष्क्रियता से भरा होता है, जो किसी को भी बेचैन व निराश करता है। 

पनाह देने वाले - कठिन समय में निस्वार्थ सहयोग व सेवा करने वाले या शरण देने वाले लोग। 

पनाह पाने वाले - बुरे वक्त या हालात के कारण कमजोर, गरीब या अन्य किसी कारण से शरण में आने वाले लोग। 

इस तरह जीवन में हर रोज इन पांच तरह के लोगों का सामना तय है। इसलिए वक्त व व्यक्तियों से तालमेल बैठाकर जीवन को सही दिशा में मोड़ना चाहिए, बजाए इन बातों से मुंह फेर खुद या दूसरों को दोषी मानकर कलह व संताप के साथ वक्त व जीवन गुजारना।